Ank 20Apr2012
समकालीन कहानियों में भारत से पावन की कहानी- फेसबुक मित्र
दिल्ली एयरपोर्ट। सुबह आठ बजकर पचास मिनट।
मैं ठीक समय पर पहुँच गया था।
एयरपोर्ट के डिपार्चर लाउन्ज में खड़ा उसे आसपास तलाश कर रहा था।
मुझे विश्वास था कि मैं उसे पहचान जाऊँगा। मैंने उसे कभी नहीं देखा था सिर्फ फेसबुक में लगी तस्वीर देखी थी। जब वह कहीं नहीं दिखाई दी तो मैंने मोबाइल फोन पर उसका नम्बर मिलाया। दूसरी तरफ तुरन्त घण्टी बजी मानों उसका मोबाइल मेरे ही नम्बर की प्रतीक्षा कर रहा हो।
‘हैलो?’ उसका परेशान और व्याकुल स्वर मेरे कानों में पड़ा।
‘क्या आप अभी पहुँची नहीं? मैं आ चुका हूँ।’ मैंने हिचकते हुए धीमे स्वर में कहा।
... विस्तार से पढ़ें...
*
दिल्ली एयरपोर्ट। सुबह आठ बजकर पचास मिनट।
मैं ठीक समय पर पहुँच गया था।
एयरपोर्ट के डिपार्चर लाउन्ज में खड़ा उसे आसपास तलाश कर रहा था।
मुझे विश्वास था कि मैं उसे पहचान जाऊँगा। मैंने उसे कभी नहीं देखा था सिर्फ फेसबुक में लगी तस्वीर देखी थी। जब वह कहीं नहीं दिखाई दी तो मैंने मोबाइल फोन पर उसका नम्बर मिलाया। दूसरी तरफ तुरन्त घण्टी बजी मानों उसका मोबाइल मेरे ही नम्बर की प्रतीक्षा कर रहा हो।
‘हैलो?’ उसका परेशान और व्याकुल स्वर मेरे कानों में पड़ा।
‘क्या आप अभी पहुँची नहीं? मैं आ चुका हूँ।’ मैंने हिचकते हुए धीमे स्वर में कहा।
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सुमन गिरि का प्रेरक प्रसंग
काँच की बरनी और दो प्याले चाय*
काँच की बरनी और दो प्याले चाय*
रचना प्रसंग में विजय कुमार से जानें
क्या कविता का अनुवाद संभव है
*
क्या कविता का अनुवाद संभव है
*
आज सिरहाने इला प्रसाद का
कहानी संग्रह- उस स्त्री का नाम*
कहानी संग्रह- उस स्त्री का नाम*
पुनर्पाठ में देखें-
कोहिनूर का घर गोलकुंडा
इस सप्ताह-
अनुभूति में- श्यामल सुमन, अनिल प्रभा कुमार, ओम प्रकाश तिवारी और संजीव गौतम के साथ नवगीत की कार्यशाला से चुनी हुए रचनाएँ।
- घर परिवार में
रसोईघर में- दाल हम रोज खाते हैं, पर कुछ नया हो तो क्या कहने? प्रस्तुत है १२ व्यंजनों की स्वादिष्ट शृंखला में- काली मलका मसूर।
बचपन की आहट- संयुक्त अरब इमारात में शिशु-विकास के अध्ययन में संलग्न इला गौतम से जानें एक साल का शिशु- नहीं से सामना।
बागबानी में- कीट नाशक दवा- अक्सर पौधों के पत्तों पर चीटियाँ चलती दिखाई देती हैं। वे यहाँ एफ़िड्स के लिये आती हैं। एफिड्स पत्तियों को खाने वाला...
वेब की सबसे लोकप्रिय भारत की जानीमानी ज्योतिषाचार्य संगीता पुरी के संगणक से- १६ अप्रैल से ३० अप्रैल २०१२ तक का भविष्यफल।
- रचना और मनोरंजन में
नवगीत की पाठशाला में- कार्यशाला-२१ में नवगीतों के प्रकाशन का क्रम पूरा हो गया है। जल्दी ही इस पर समीक्षा प्रकाशित करने का प्रयत्न करेंगे।
साहित्य समाचार में- देश-विदेश से साहित्यिक-सांस्कृतिक समाचारों, सूचनाओं, घोषणाओं, गोष्ठियों आदि के विषय में जानने के लिये यहाँ देखें
लोकप्रिय कहानियों के अंतर्गत- प्रस्तुत है- १६ सितंबर २००४ को प्रकाशित, अमेरिका से सीमा खुराना की कहानी— बूढ़ा शेर
कोहिनूर का घर गोलकुंडा
इस सप्ताह-
अनुभूति में- श्यामल सुमन, अनिल प्रभा कुमार, ओम प्रकाश तिवारी और संजीव गौतम के साथ नवगीत की कार्यशाला से चुनी हुए रचनाएँ।
- घर परिवार में
रसोईघर में- दाल हम रोज खाते हैं, पर कुछ नया हो तो क्या कहने? प्रस्तुत है १२ व्यंजनों की स्वादिष्ट शृंखला में- काली मलका मसूर।
बचपन की आहट- संयुक्त अरब इमारात में शिशु-विकास के अध्ययन में संलग्न इला गौतम से जानें एक साल का शिशु- नहीं से सामना।
बागबानी में- कीट नाशक दवा- अक्सर पौधों के पत्तों पर चीटियाँ चलती दिखाई देती हैं। वे यहाँ एफ़िड्स के लिये आती हैं। एफिड्स पत्तियों को खाने वाला...
वेब की सबसे लोकप्रिय भारत की जानीमानी ज्योतिषाचार्य संगीता पुरी के संगणक से- १६ अप्रैल से ३० अप्रैल २०१२ तक का भविष्यफल।
- रचना और मनोरंजन में
नवगीत की पाठशाला में- कार्यशाला-२१ में नवगीतों के प्रकाशन का क्रम पूरा हो गया है। जल्दी ही इस पर समीक्षा प्रकाशित करने का प्रयत्न करेंगे।
साहित्य समाचार में- देश-विदेश से साहित्यिक-सांस्कृतिक समाचारों, सूचनाओं, घोषणाओं, गोष्ठियों आदि के विषय में जानने के लिये यहाँ देखें
लोकप्रिय कहानियों के अंतर्गत- प्रस्तुत है- १६ सितंबर २००४ को प्रकाशित, अमेरिका से सीमा खुराना की कहानी— बूढ़ा शेर
गोपालकृष्ण-भट्ट-आकुल और रश्मि आशीष के सहयोग से
सप्ताह का कार्टून-
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पिछले अंकों में....
समकालीन कहानियों में भारत से पावन की कहानी- फेसबुक मित्र
सुमन गिरि का प्रेरक प्रसंग
काँच की बरनी और दो प्याले चाय*
रचना प्रसंग में विजय कुमार से जानें
क्या कविता का अनुवाद संभव है
*
आज सिरहाने इला प्रसाद का
कहानी संग्रह- उस स्त्री का नाम*
पुनर्पाठ में देखें-
कोहिनूर का घर गोलकुंडा
बहुत से काम हैं
लिपटी हुई धरती को फैला दें
दरख़्तों को उगाएँ, डालियों पर फूल महका दें
पहाड़ों को क़रीने से लगाएँ
चाँद लटकाएँ
ख़लाओं के सरों पे नीलगूँ आकाश फैलाएँ
सितारों को करें रौशन
हवाओं को गति दे दें
फुदकते पत्थरों को पंख देकर नग़्मगी दे दें
लबों को मुस्कुराहट
अँखड़ियों को रोशनी दे दें
सड़क पे डोलती परछाइयों को ज़िन्दगी दे दें
खुदा ख़ामोश है,
तुम आओ तो तख़लीक़ हो दुनिया
मैं इतने सारे कामों को अकेले कर नहीं सकता
किसी को टूट के चाहा, किसी से खिंच के रहे
दुखों की राहतें झेलीं, खुशी के दर्द सहे
कभी बगूला से भटके
कभी नदीं से बहे
कहीं अँधेरा, कहीं रोशनी, कहीं साया
तरह-तरह के फ़रेबों का जाल फैलाया
पहाड़ सख्त था, वर्षों में रेत हो पाया।
रुख़्सत होते वक़्त
उसने कुछ नहीं कहा
लेकिन एयरपोर्ट पर
अटैची खोलते हुए
मैंने देखा
मेरे कपड़ों के नीचे
उसने
अपने दोनों बच्चों की तस्वीर छुपा दी है
तअज्जुब है
छोटी बहन होकर भी
उसने मुझे माँ की तरह दुआ दी है।
आज सिरहाने । उपन्यास । उपहार । कहानियाँ । कला दीर्घा । कविताएँ । गौरवगाथा । पुराने अंक । नगरनामा । रचना प्रसंग । पर्व पंचांग । घर–परिवार । दो पल । नाटकपरिक्रमा । पर्व–परिचय । प्रकृति । पर्यटन । प्रेरक प्रसंग । प्रौद्योगिकी । फुलवारी । रसोई । लेखक । विज्ञान वार्ता । विशेषांक । हिंदी लिंक । साहित्य संगम । संस्मरण
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